शहडोल। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) के सोहागपुर क्षेत्र से उठी माइनिंग सुपरवाइजरों की पदोन्नति की मांग अब पूरे एसईसीएल में बड़ा मुद्दा बनती जा रही है। वर्ष 2015-16 से माइनिंग सरदार से ओवरमैन ग्रेड-बी पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। लगातार नौ से बारह वर्षों से लंबित पदोन्नति के कारण कर्मचारियों में असंतोष और नाराजगी बढ़ती जा रही है।
चारों यूनियनें आईं एक साथ, प्रबंधन के सामने रखीं मांगें
माइनिंग सरदारों की समस्याओं को लेकर अब एटक, एचएमएस, एआईडीईओए और बीएमएस जैसी प्रमुख यूनियनें एक मंच पर आ गई हैं। बीएमएस ने 3 अगस्त 2026 को, जबकि एटक और एचएमएस ने 5 अगस्त 2026 को निदेशक कार्मिक, एसईसीएल बिलासपुर को पत्र लिखकर पदोन्नति प्रक्रिया में आ रही बाधाओं को दूर करने की मांग की है। वहीं ऑल इंडिया डिप्लोमा इंजीनियर्स एंड ऑफिसर्स एसोसिएशन (एआईडीईओए) ने भी कर्मचारियों के समर्थन में कड़ा रुख अपनाया है।
माइनिंग सरदारों ने उत्पादन और सुरक्षा में निभाई अहम भूमिका
बीएमएस के एसईसीएल संचालन समिति सदस्य एवं एबीकेएमएस-बीएमएस के महामंत्री सुजीत सिंह ने अपने पत्र में कहा है कि कई क्षेत्रों में पिछले 10 से 12 वर्षों से माइनिंग सरदारों की पदोन्नति श्रम-शक्ति बजट के अभाव में अटकी हुई है।
उन्होंने कहा कि कोयला उत्पादन और खदानों की सुरक्षा में माइनिंग सरदारों ने हमेशा अग्रिम पंक्ति में रहकर अपनी जिम्मेदारियां निभाई हैं। ऐसे में वर्षों से ओवरमैन की योग्यता रखने वाले कर्मचारियों को वर्ष 2026 के श्रम-शक्ति बजट के अंतर्गत एकमुश्त पदोन्नति दी जानी चाहिए।
अब और अन्याय बर्दाश्त नहीं होगा
एसईसीएल बिलासपुर कल्याण मंडल सदस्य एवं सोहागपुर क्षेत्र एटक यूनियन के सचिव राजेश चंद्र शर्मा ने कहा कि सोहागपुर क्षेत्र से शुरू हुआ यह आंदोलन अब पूरे एसईसीएल में फैलने की स्थिति में पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि ओवरमैन ग्रेड-बी एक महत्वपूर्ण पर्यवेक्षकीय पद है, लेकिन ग्रेड-बी के पदों की कमी के कारण पूरी पदोन्नति व्यवस्था प्रभावित हो रही है। वर्ष 2015 से इंतजार कर रहे कर्मचारियों के साथ हो रहा अन्याय अब किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने सभी यूनियनों से अपील करते हुए कहा कि यूनियन सत्यापन से पहले इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने का प्रयास किया जाए, अन्यथा आंदोलन और तेज हो सकता है।
एचएमएस ने उठाए पदोन्नति नीति पर सवाल
कोयला मजदूर सभा (एचएमएस) के महामंत्री नाथूलाल पांडे ने कहा कि वर्तमान पदोन्नति नीति माइनिंग सरदारों के कैरियर विकास के उद्देश्य को ही समाप्त कर रही है।
उन्होंने बताया कि डीजीएमएस ओवरमैन प्रमाणपत्र और आवश्यक योग्यता होने के बावजूद कर्मचारियों को सीधे ओवरमैन ग्रेड-बी के बजाय जूनियर ओवरमैन ग्रेड-सी में पदस्थ किया जा रहा है। इससे कर्मचारियों को न तो वेतन वृद्धि का लाभ मिल रहा है और न ही आर्थिक उन्नति का अवसर।
एआईडीईओए ने भी दिया समर्थन
एआईडीईओए सोहागपुर क्षेत्र के अध्यक्ष विनीत दुबे और राविन श्रीवास्तव ने कहा कि उनकी यूनियन माइनिंग स्टाफ के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रही है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नौ वर्षों से लंबित पदोन्नति को अब और टाला नहीं जा सकता। कर्मचारियों को उनका अधिकार दिलाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष किया जाएगा।
पदों की कमी बनी सबसे बड़ी समस्या
300 में से 250 पद पहले ही भर चुके हैं। सीएमडी कार्यालय बिलासपुर में हुई बैठक के दौरान प्रबंधन ने स्वीकार किया कि एसईसीएल में ओवरमैन के कुल लगभग 300 पद थे, जिनमें से 250 पद जूनियर ओवरमैन से भर दिए गए हैं। वर्तमान में केवल 40 से 50 पद ही खाली बचे हैं। वहीं अकेले सोहागपुर क्षेत्र में ही 60 से अधिक माइनिंग सरदार पदोन्नति के लिए पात्र हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है।
संयुक्त यूनियनों की प्रमुख मांगें
ओवरमैन ग्रेड-बी के स्वीकृत पदों में तत्काल वृद्धि की जाए। योग्य माइनिंग सरदारों को सीधे ओवरमैन ग्रेड-बी में पदोन्नत किया जाए। वर्ष 2026 के श्रम-शक्ति बजट में सभी पात्र कर्मचारियों को एकमुश्त पदोन्नति दी जाए। पदोन्नति नीति में आवश्यक संशोधन कर कर्मचारियों के हितों की रक्षा की जाए।
कर्मचारियों की अंतिम चेतावनी
"या तो प्रमोशन दो, या हमारा इस्तीफा लो" लगातार वर्षों से पदोन्नति का इंतजार कर रहे माइनिंग सुपरवाइजरों का कहना है कि उन्होंने अपना पूरा जीवन कोयला उत्पादन और कंपनी की प्रगति के लिए समर्पित कर दिया, लेकिन आज भी उन्हें उनके अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। कर्मचारियों ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है। अब देखना यह होगा की एसईसीएल के द्वारा क्या कार्रवाई की जा रही है।

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